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Saturday, 24 July 2021

इश्क दुबारा हो गया



आंखों का रुख आवारा हो गया 
शायद इश्क तुमसे दोबारा हो गया 


लगाकर काजल मिलते हैं तुमसे 
कहीं इसको हमारे नजर ना लग जाए 
दिल धड़क धड़क कर बेचैन हैं 
आने की तुम्हारे कहीं से खबर ना लग जाए 
तेरा मिलना जीने का सहारा हो गया 


आंखों का रुख आवारा हो गया 
शायद इश्क तुमसे दोबारा हो गया 


तरसे निगाहें मेरी तुझे पाने को 
तरसती है तुझे अपना बनाने को 
मुश्किल क्या है इस दिल की 
कैसे करूं बयां में जमाने को 
मिलन जब से हमारा हो गया 


आंखों का रुख आवारा हो गया 
शायद इश्क तुमसे दोबारा हो गया

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