आंखों का रुख आवारा हो गया
शायद इश्क तुमसे दोबारा हो गया
लगाकर काजल मिलते हैं तुमसे
कहीं इसको हमारे नजर ना लग जाए
दिल धड़क धड़क कर बेचैन हैं
आने की तुम्हारे कहीं से खबर ना लग जाए
तेरा मिलना जीने का सहारा हो गया
आंखों का रुख आवारा हो गया
शायद इश्क तुमसे दोबारा हो गया
तरसे निगाहें मेरी तुझे पाने को
तरसती है तुझे अपना बनाने को
मुश्किल क्या है इस दिल की
कैसे करूं बयां में जमाने को
मिलन जब से हमारा हो गया
आंखों का रुख आवारा हो गया
शायद इश्क तुमसे दोबारा हो गया





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